' मां ' माँ के बारे में मैं क्या ही लिखूं.. मैं ही नहीं , दुनिया की कोई भी कलम मां का विवरण नहीं कर सकती । यह एक ऐसा शब्द है, जो हर एक व्यक्ति के जीवन में बहुत ही महत्व रखता है, चाहे वह नेता हो या अभिनेता, रंक हो या राजा , गरीब हो या अमीर , लड़का हो या लड़की मां के बिना सब अधूरे हैं। आज हम चाहे जितने भी बड़े हो जाए पर मां के बिना हम सब अधूरे हैं।
मां का आंचल धूप में छांव की तरह ,
मां की बातें गर्मी में छाछ की तरह ।
अगर हाथ है सर पर मां का तो ,
दुनिया में हम राजा की तरह ।।
यह बात 2008 की है दिवाली का समय था , पापा ने मम्मी के लिए एक साड़ी खरीदी , बनारसी साड़ी, जो की उन दिनों की बहुत ही फेमस साड़ी हुआ करती थी , जिसका रंग हरा और लाल में था और उस साड़ी के ऊपर - नीचे साइड में सिल्वर कलर का गोटा लगा था, जो कि अपने आप में एक बहुत ही आकर्षक लग रहा था। उसका ब्लाउज गाड़े हरे रंग का था। जब वह साड़ी मेरी मां पहना करती थी तो , ऐसा लगता था जैसे कि स्वर्ग से कोई परी आ गई है । बहुत सुंदर लगती थी । वैसे तो मेरी मम्मी के ऊपर हर एक साड़ी बहुत सुंदर लगती थी , लेकिन उस साड़ी की बात ही कुछ अलग थी ।
आज मेरी मम्मी इस दुनिया में नहीं है ....लेकिन आज भी उनकी पसंदीदा वह बनारसी साड़ी, सही सलामत मेरे पास है। मेरे पास मेरी मम्मी की कई सारी साड़िया है । कुछ उनकी पहनी हुई है साड़ियां तो कुछ उनकी नहीं पहनी हुई है। आज भी मैं उनको बहुत संभाल के रखी हूं। मेरे पास मेरी अलमारी में बहुत सारी साड़ियां है लेकिन, उन सब सारी साड़ियों मे मुझे मेरी मां की साड़ियां ही बहुत पसंद आती है। उनकी हर एक साड़ी से कोई ना कोई यादें जुड़ी हुई है। मानो हर एक साड़ी अपने आप में एक नई और एक बहुत खास है। उन साड़ियों को पहन कर एक अलग ही सुकून मिलता हैं। मुझे मेरी मां की बहुत याद आती है.. उनका आंचल, उनका स्पर्श, उनका प्यार , उनकी बातें ,उनकी लोरी, उनके हाथ का बना हुआ खाना , सब बहुत याद आता है । आज भी कोई अच्छे प्रसंग पर जब मैं अपनी मां की वह बनारसी साड़ी पहनती हूं तो मेरी आंखें भर आती है।
मेरी माँ की वह बनारसी साड़ी मेरे लिए उनका आशीर्वाद के रूप में मेरे पास हमेशा रहेगी। जब भी मैं वह साड़ी पहनुंगी तो ऐसा लगेगा कि जैसे मेरी माँ साक्षात तौर पर मुझे अपना आशीर्वाद दे रही हैं।"माँ का प्रेम जीवन की सबसे अनमोल धरोहर है।"
इस धरती पर हमको माँ ने लाया,
पर लोग कहते हैं कि हमको भगवान ने बनाया ।
किसने देखा है आज तक भगवान को यहां,
इसीलिए भगवान खुद मां के रूप में धरती पर आया ।।
विजयलक्ष्मी विनय तिवारी मुंबई
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